अधिग्रहित भूमि पर स्वीकृत निर्माण कार्यों का मामला पहुंचा केन्द्रीय सूचना आयोग के पास
कोल बैरिंग एक्ट के तहत अधिग्रहित भूमि पर ग्राम सभा द्वारा कराए गए कार्यों पर एनसीएल द्वारा रोक नहीं लगाए जाने पर केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा नोटिस
आरटीआई द्वितीय अपील के तहत होगी सुनवाई
शक्तिनगर 15 मई। एनसीएल के अधिग्रहित भूमि में कराये गये निर्माण कार्यों का मामला अब केन्द्रीय सूचना आयोग के यहां पहुंच गया है। 31 मई को वीडियो कान्फे्रंसिंग के माध्यम से सुनवाई होगी। केन्द्रीय सूचना आयोग की न्यायपीठ ने एनसीएल सिंगरौली को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
दरअसल जानकारी के मुताबिक क्षेत्र के खडिय़ा ग्राम सभा द्वारा कोल बैरिंग एक्ट 1957 के तहत संपूर्ण भूमि का अधिग्रहण किया गया था। राजस्व विभाग के अभिलेख 5 दिसम्बर 2018 के अनुसार ग्राम सभा खडिय़ा अंतर्गत नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड सिंगरौली के अतिरिक्त किसी खातेदार के नाम जमीन दर्ज नहीं है और कोल बैरिंग एक्ट 1957 के तहत निषिद्ध क्षेत्र घोषित है। बावजूद इसके ग्राम सभा खडिय़ा द्वारा पंचायत निधि का दुरुपयोग करते हुए परियोजना की भूमि पर विधि विरुद्ध कार्य कराया जाता रहा जिसकी शिकायत पीजी पोर्टल के माध्यम से कोयला मंत्रालय को किया गया था पर शिकायत को संज्ञान में नहीं लिया गया जिस पर आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत मिश्रा द्वारा आरटीआई आवेदन एवं अपील केंद्रीय सूचना आयोग में पंजीकृत कराया गया था। प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए सूचना आयुक्त सरोज पुन्हानी की न्याय पीठ ने नोटिस जारी करते हुए लोक प्राधिकरण नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड सिंगरौली अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया गया।
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केन्द्रीय सूचना आयोग 31 मई को करेगा सुनवाई
नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड सिंगरौली द्वारा अधिग्रहित भूमि पर कराए गए कार्यों एवं अन्य सूचनाओं के संबंध में आरटीआई जनहित याचिका की सुनवाई केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा किया जाएगा नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड को नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया गया है सूचना आयुक्त सरोज पुन्हानी की न्याय पीठ द्वारा जारी नोटिस के अनुसार इस प्रकरण की भी सुनवाई 31 मई को ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया जाएगा।