
उद्यानिकी मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है और किसानों का सशक्तिकरण राज्य के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में जल संसाधनों की सीमित उपलब्धता और बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता बन गई है। उद्यानिकी फसलों में सूक्ष्म सिंचाई के साथ सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृव में कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए उद्यानकी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में भोपाल में राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी लगाई गई है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह शनिवार को भोपाल स्थित प्रमुख उद्यान (गुलाब गार्डन) में राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि प्रदेश में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन, उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि के साथ जल और उर्वरक के दक्ष उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सूक्ष्म सिंचाई एवं सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है यह समय की मांग है। किसान इसको अपनाकर उच्च गुणवत्ता की खेती कर सकते है।
उद्यानिकी सचिव श्री जॉन किंग्सली ने बताया कि प्रणाली के माध्यम से पौधों को उनकी आवश्यकता के अनुसार संतुलित मात्रा में पानी और उर्वरक उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इससे न केवल जल और उर्वरकों की बचत होती है, बल्कि श्रम लागत में कमी, खरपतवार नियंत्रण और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार भी संभव होता है। परिणामस्वरूप फसल की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ उत्पादन और उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।
कार्यशाला में जानकारी दी गई कि प्रदेश में योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में क्रियान्वित की जा रही है, जिसके अंतर्गत प्रति हितग्राही एक यूनिट का लाभ दिया जाएगा। योजना का लाभ उठाने के लिए कृषक के पास न्यूनतम 0.250 हेक्टेयर रकबा उद्यानिकी फसलों के अंतर्गत होना अनिवार्य है।
परियोजना के अंतर्गत भारत सरकार की एमआईडीएच (MIDH) योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रति हितग्राही निर्धारित इकाई लागत 4 लाख रुपये है, जिस पर 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार अधिकतम 2 लाख रुपये तक का अनुदान हितग्राही कृषक को देय होगा। यह सहायता सीधे किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।
उद्यानिकी आयुक्त श्री अरविंद दुबे ने बताया कि सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली को प्रदेश में 715 कृषकों के खेतों में स्थापित करने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 597 कृषकों के विभागीय पोर्टल पर आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। शेष पात्र कृषकों को भी योजना से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि योजना के सफल क्रियान्वयन में निचले स्तर पर कार्यरत अमला महत्वपूर्ण कड़ी है, क्योंकि वही सीधे किसानों से संपर्क करता है। योजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के लिए जिला अधिकारियों, निर्माता कंपनियों और कृषकों के बीच समन्वय आवश्यक है। समस्त जिला अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में परियोजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें तथा इच्छुक और पात्र कृषकों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराएं। साथ ही किसानों के आवेदन विभागीय पोर्टल पर समय पर दर्ज कराए जाएं, जिससे उन्हें योजना का लाभ शीघ्र मिल सके।
अपर संचालक श्री किरार ने मैदानी अधिकारियों से कहा कि किसानों को परियोजना की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें त्वरित तकनीकी सहायता प्रदान की जाए, जिससे संयंत्र स्थापना में अनावश्यक विलंब न हो।
कार्यक्रम के समापन पर विश्वास व्यक्त किया गया कि राज्य स्तरीय कार्यशाला के माध्यम से प्रदेश में सूक्ष्म सिंचाई और सेंसर आधारित तकनीकों को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया जा सकेगा और अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों से जुड़कर लाभान्वित होंगे।