छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़, वित्तीय अनियमितता के बाद भी मेहरवानी क्यों

छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़, वित्तीय अनियमितता के बाद भी मेहरवानी क्यों
एक ही प्राध्यापक पर तीन-तीन महाविद्यालयों का प्रभार, आखिर क्यों, चितरंगी में प्राध्यापक मौजूद, फिर भी नहीं मिला दायित्व

सिंगरौली 25 फरवरी। अंधा बांटे रेवड़ी, चुन-चुन अपने को दे, यह कहावत इन दिनों बैढ़न के डिग्री कॉलेज में चरितार्थ होती नजर आ रही है। छात्र-छात्राओं और शैक्षणिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं कि आखिर किस विशेष आधार पर एक ही प्राध्यापक को तीन-तीन महावि. का प्रभार सौंप दिया गया है।
मामला शासकीय स्व. जगन्नाथ सिंह स्मृति महावि. चितरंगी, मॉडल कॉलेज रंपा और शास. प्रधानमंत्री एक्सीलेंस कॉलेज बैढ़न से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार एक्सीलेंस कॉलेज बैढ़न में पदस्थ एक प्राध्यापक को न सिर्फ अपने महावि. का प्रशासनिक प्रभारी बनाया गया है, बल्कि चितरंगी और मॉडल कॉलेज रंपा का भी प्राचार्य प्रभार दे दिया गया है। जिला मुख्यालय बैढ़न से चितरंगी की दूरी लगभग 85 किलोमीटर और रंपा की दूरी करीब 25 किमी बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि एक ही व्यक्ति तीन संस्थानों की शैक्षणिक व प्रशासनिक मॉनिटरिंग कितनी प्रभावी ढंग से कर पाएगा। आश्चर्य की बात यह है कि चितरंगी महावि. में नियमित प्राध्यापक एवं अतिथि विद्वान कार्यरत होने के बावजूद उन्हें प्राचार्य का दायित्व नहीं सौंपा गया। इससे संदेह और गहरा गया है कि नियुक्ति योग्यता और उपलब्धता के आधार पर हुई या फिर व्यक्तिगत समीकरणों के चलते यह फैसला लिया गया। अब निगाहें भोपाल स्थित उच्च शिक्षा विभाग भोपाल पर टिकी हैं। यदि विभागीय अधिकारियों की मौन स्वीकृति या संरक्षण प्राप्त है, तो निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद धुंधली पड़ती दिख रही है। शिक्षा जैसे गंभीर क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है, अन्यथा मेहरबानी और प्रभाव की यह संस्कृति पूरे तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर देगी।
तीन माह पूर्व प्रभार, अब हटाया
सूत्रों की मानें तो दो-तीन माह पूर्व चितरंगी महाविद्यालय का प्रभार एक अन्य प्राध्यापक को दिया गया था, जिन्हें बाद में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में हटा दिया गया। हालांकि चर्चाएं यह भी हैं कि वित्तीय मामलों की डीडीओ शक्ति डिग्री कॉलेज बैढ़न स्तर पर केंद्रित होने के बावजूद कार्रवाई केवल एक व्यक्ति तक सीमित क्यों रही? यदि आर्थिक निर्णयों में उच्च स्तर की भूमिका थी, तो जांच का दायरा व्यापक क्यों नहीं बनाया गया? कैंपस में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि नए प्रभारी प्राचार्य के रूप में जिम्मेदारी मिलने के बाद संबंधित प्राध्यापक का चितरंगी महाविद्यालय में सीमित दौरा ही हुआ है। ऐसे में शैक्षणिक गतिविधियों, छात्र समस्याओं और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी किस स्तर पर हो रही है, यह स्पष्ट नहीं है।