डिग्री कॉलेज बैढ़न का मामला, वर्ष 2023-24 का अधिकतम टर्नओवर तय, लेकिन करंट टर्नओवर की अनदेखी क्यों

बिड में खेल सामग्री का नाम न ब्रांड
डिग्री कॉलेज बैढ़न का मामला, वर्ष 2023-24 का अधिकतम टर्नओवर तय, लेकिन करंट टर्नओवर की अनदेखी क्यों?

सिंगरौली 24 दिसम्बर। शासकीय महाविद्यालय बैढ़न में स्टेशनरी, खेलकूद सामग्री और फर्नीचर क्रय के नाम पर एक बार फिर बड़ा खेल रचने की तैयारी सामने आई है। इस बार पूरा मामला जैम पोर्टल के माध्यम से जारी की गई बोली से जुड़ा है, जिसमें शुरुआत से ही नियमों को ताक पर रखकर शर्तें इस तरह गढ़ी गई हैं कि संदेह गहराता जा रहा है। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की खरीद प्रक्रिया न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़़े करती है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर भी इशारा करती है। यह खरीदी खनिज प्रतिष्ठान मद से मिली राशि से होगी।
जैम पोर्टल में महाविद्यालय के प्राचार्य पीएमसीओई शासकीय राजनारायण स्मृति अग्रणी महाविद्यालय बैढ़न द्वारा आमंत्रित की गई बोली की शर्तो में 2023-24 का अधिकतम टर्नओवर तय, लेकिन करंट टर्नओवर की अनदेखी क्यों, बोली की शर्तों में वर्ष 2023-24 का अधिकतम टर्नओवर 5 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि करंट फाइनेंशियल ईयर का टर्नओवर मांगा ही नहीं गया। सवाल यह उठता है कि जब कंपनी की वर्तमान वित्तीय स्थिति ही स्पष्ट नहीं है, तो उसके आधार पर लाखों-करोड़ों रूपये की सामग्री खरीद कैसे की जा सकती है, विशेषज्ञों का मानना है कि यह शर्त जानबूझकर रखी गई है, ताकि पहले से तय कथित बोलीदार को लाभ पहुंचाया जा सके। वहीं सूत्रों की मानें तो इस पूरे प्रकरण में प्राचार्य की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। नियमों की अनदेखी, अस्पष्ट शर्तें और जल्दबाजी में बिड प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश कई सवाल खड़े कर रही है। अगर समय रहते जिला प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह मामला लाखों-करोड़ों रूपये के घोटाले में तब्दील हो सकता है। अब निगाहें कलेक्टर और शासन पर टिकी हैं, क्या इस बार भी मामला फाइलों में दब जाएगा या शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। फिलहाल उक्त महाविद्यालय के द्वारा बुलाई गई बिड में कई विसंगतियों को लेकर महाविद्यालय बैढ़न के प्राचार्य भी सवालों के घिरते नजर आ रहे हैं। यहां के कई प्रबुद्धजनों ने कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट कराते हुये बिड को पुन: से निरस्त कराने की मांग की है।
31 दिसंबर को ही निविदा बंद और उसी दिन खोलने की जल्दी क्यों
बिड की अंतिम तिथि 31 दिसंबर तय की गई है और हैरानी की बात यह है कि उसी दिन बिड खोलने की तिथि भी निर्धारित कर दी गई है। न तो पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया गया और न ही बाहरी कंपनियों को तैयारी का मौका दिया गया। इससे पहले भी करीब दो महीने पूर्व इसी तरह की बिड आई थी, जिसमें कई विसंगतियां सामने आई थीं। उस समय मामला कलेक्टर के संज्ञान में आया, जिसके बाद लाखों रुपये के खनिज प्रतिष्ठान फण्ड से सामग्री खरीदी की मंजूरी दी गई थी। अब वही पैटर्न दोहराया जा रहा है। इतना ही नहीं, शासकीय महाविद्यालय बैढ़न के साथ-साथ कन्या महाविद्यालय सिंगरौली में भी इसी बिड के तहत सामग्री खरीदी की योजना है। इससे साफ है कि मामला सिर्फ एक कॉलेज तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में जड़ें जमा चुका है।
खेल सामग्री का न नाम, न ब्रांड, न गुणवत्ता, तो खरीद किस आधार पर
बोली में जिन खेल सामग्रियों की खरीद दर्शाई गई है, उनमें किसी भी मान्यता प्राप्त कंपनी या ब्रांड का नाम उल्लेखित नहीं है। न तो सामग्री की गुणवत्ता के मानक तय किए गए हैं और कुछ के क्वांटिटी का विवरण दिया गया है। इतना ही नही रोलर कितने केजी और किस कंपनी का होना चाहिए, इसका कही जिक्र नही है। कबड्डी मेट अधिक्तम 20 से 25 एमएम का होना चाहिए। लेकिन पोर्टल में कबड्डी मेट 35 एमएम उल्लेख है। इसके अलावा पॉवर लिफ्टिंग सेट का वजन 182 होना चाहिए, परंतु बोली में एक सेट उल्लेख है। ऐसे में यह आशंका गहराती है कि घटिया और अनुपयोगी सामग्री ऊंचे दामों पर खरीदी जा सकती है। इससे न केवल छात्रों के खेलकूद भविष्य पर असर पड़ेगा, बल्कि सरकारी खजाने को भी सीधी चोट पहुंचेगी और इसमें सब कुछ सुनियोजित बातें नजर आ रही है।