बंधा कोल ब्लॉक में रोजगार और विकास की उम्मीदें जगीं, लेकिन भुगतान में और तेजी की दरकार
प्रोजेक्ट में देरी से राजस्व नुकसान, फिर भी मुआवजा प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार, कंपनी ने जमा किए 600 करोड़ से अधिक, अब प्रशासन पर बढ़ा दबाव, भूमिहीनों को भी दिया जा रहा पीडीएफ का लाभ
सिंगरौली 27 मार्च। बंधा कोल प्रोजेक्ट के तहत मुआवजे का भुगतान शुरू होते ही ग्रामीणों के चेहरों पर राहत और संतोष साफ नजर आने लगा है। वर्षों से आर्थिक तंगी झेल रहे कई परिवारों को जैसे नई जिंदगी मिल गई हो। हालांकि अभी बड़ी संख्या में मुआवजा वितरण बाकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है, जिससे क्षेत्र में विकास और रोजगार की उम्मीदें एक बार फिर मजबूत होती दिख रही हैं।
दरअसल जिले के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा देने वाला बहुप्रतीक्षित बंधा कोल प्रोजेक्ट आज भी शुरू होने का इंतजार कर रहा है। इस बीच कुछ अच्छी खबर यह है कि कंपनी द्वारा ग्रामीणों के लिए करीब 629 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जमा किए जाने के बाद अब धीरे-धीरे उनके मुआवजे का भुगतान प्रशासन द्वारा शुरू किया गया है । लेकिन अभी इसकी रफ्तार जरा धीमी है। भुगतान बीते कुछ दिनों से विभागीय लिंक फेल होने की वजह से लंबित था, जिसने गुरुवार से फिर रफ्तार पकड़ी है। धीरे-धीरे मुआवजे का भुगतान किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया है कि संभवतया वित्तीय वर्ष 25-26 के खत्म होने यानी 31 मार्च के बाद ही इस दिशा में और रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। हालांकि प्रोजेक्ट के अधीन आरहे गांवो की मासूम जनता को कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए प्रोजेक्ट के विरोध में अभी भी ना केवल उकसा रहे हैं, बल्कि उन्हें भड़का कर जमीन समर्पण पत्र नहीं सौंपने दे रहे हैं। इस वजह से भी अवॉर्ड की राशि का वितरण प्रभावित हो रहा है। लेकिन हालत यह हैं कि कुछ लोग इस प्रोजेक्ट की दूसरी ही तस्वीर पेश कर रहे हैं, जो हकीकत से काफी दूर है। यहां बताते चले कि 3 मार्च 2021 को इस प्रोजेक्ट का आवंटन हुआ था और मई 2025 में माइनिंग लीज भी कंपनी को दे दिया गया। कोयला परियोजना के समय से चालू होने से जिस स्तर पर रोजगार का सृजन होना है और जिस तरह से समुदाय के लिए आय के विभिन्न साधनों का निर्माण होना है, वह फिलहाल रुका हुआ है।
लामीदह में 250 एकड़ जमीन पर आर एंड आर कॉलनी का निर्माण
महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी द्वारा बंधा कोल प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रशासन द्वारा अवॉर्ड से विधि विरुद्ध एवं अपवर्जित संरचनाओं को भी अनुदान स्वरूप एक निश्चित मुआवजे की राशी देने का फैसला किया गया है। साथ ही प्रोजेक्ट के लिए जिन 800 हेक्टेयर भूमि पर वनों की कटाई वन विभाग द्वारा की जानी है, उसके बदले प्रदेश के विभिन्न जिलों में इतनी ही जमीन सीए लैंड के तहत ली जा चुकी है और उसपर प्रतिपूरक वृक्षारोपण कराया जाएगा। प्रोजेक्ट क्षेत्र की जनता को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके, इसके लिए विस्थापित हो रहे वैसे लोगों को भी पीडीएफ का लाभ दिया जा रहा है, जिनके पास जमीन का स्वामित्व नहीं था। दूसरी तरफ विस्थापितों के लिए लामीदह में 250 एकड़ जमीन पर आर एंड आर कॉलनी का निर्माण प्रगति पर है, जो स्कूल अस्पताल, मार्केटिंग कॉम्पलेक्स, सामुदायिक भवन इत्यादि सुविधाओं से लैस होगा।
परमेश की कहानी उन्ही की जुबानी
मुआवजे का पैसा मिलने से मुझे पूंजी मिल गई, जिसके कारण पिछले 6 महीने से बंद मेरी किराना की दुकान फिर से खुल गई। मैंने मुआवजे से मिले पैसे से न सिर्फ दुकान खोल ली, बल्कि पास में ही जमीन खरीदकर अपने और अपने बच्चों के भविष्य को भी सुरक्षित कर लिया है। यह कहना है बंधा गांव के निवासी परमेश कुमार गुर्जर का । जिन्हें बंधा कोल प्रोजेक्ट के तहत मुआवजे की अच्छी राशि मिली है। परमेश बताते हुए भावुक हो जाते हैं कि अपनी बंद पड़ी किराने की दुकान को फिर से खोल सके हैं । वे बताते हैं कि मुआवजे की राशि ने उनकी जीवन को फिर से एक गति दी है। यह कहानी बंधा कोल प्रोजेक्ट के तहत मुआवजे की राशि पाने वाले कई ग्रामीणों की है।