मोरवा विस्थापितों के मुआवजे को लेकर पार्षद दल ने एनसीएल प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन
सिंगरौली जिले के मोरवा क्षेत्र के विस्थापितों को मुआवजा वितरण में हो रही देरी और अनियमितता को लेकर शनिवार को मोरवा के पार्षद दल ने एनसीएल सभागार में कोल इंडिया के सीईओ व एनसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक बी साईंराम से मुलाकात कर विस्थापितों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा करते हुए ज्ञापन सौंपा।
पार्षदों ने मांग की कि सभी वार्डों (विशेषकर वार्ड क्रमांक 4, 5, 6, 7 एवं 8) के विस्थापितों को एक साथ और समयबद्ध तरीके से मुआवजा वितरित किया जाए। हालांकि उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान सीएमडी द्वारा इस मांग पर कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं दिया गया। पार्षदों के अनुसार, प्रबंधन के रुख से यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित वार्डों का मुआवजा कम से कम 6 से 7 वर्ष बाद ही वितरित हो पाएगा।
बैठक में पार्षदों ने यह भी मांग रखी कि जरूरतमंद विस्थापित परिवारों—जिनमें बेटी की शादी, गंभीर बीमारी अथवा उच्च शिक्षा जैसी आपात आवश्यकताएं है। जिनकी प्राथमिकता के आधार पर मुआवजा दिया जाए, लेकिन इस प्रस्ताव को भी प्रबंधन द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। इसके स्थान पर मुआवजे को तीन चरणों (स्ट्रिप्स) में देने की बात कही गई।
पार्षद दल ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब विस्थापितों के मकानों का मुआवजा 7 से 10 वर्ष बाद दिया जाएगा, तो उस स्थिति में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का लार एक्ट की धारा 80 को प्रभावशील करते हुए मकान की वर्तमान दर के अनुसार ब्याज सहित मुआवजा दिया जाना चाहिए। पार्षदों का तर्क था कि आज के मकान की कीमत 10 वर्ष बाद कई गुना बढ़ जाएगी, ऐसे में बिना ब्याज मुआवजा देना विस्थापितों के साथ अन्याय होगा। इस पर सीएमडी ने कुछ बिंदुओं पर विचार करने की बात कही, लेकिन किसी ठोस निर्णय की घोषणा नहीं की।
पार्षदों ने बताया कि अब इन सभी मुद्दों को लेकर वह जनता के बीच जन चौपाल आयोजित कर पूरी स्थिति से अवगत कराएंगे और जनता के निर्णय के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।