30 महीने में भी बरगवां का अधूरा ओवर ब्रिज
35 करोड़ का आरओबी बना बरगवां के लिए अभिशाप, बरगवां बाजार का व्यापार चौपट, ठेकेदार उदासीन
सिंगरौली 25 दिसम्बर। जिले के बरगवां क्षेत्र में पश्चिम मध्य रेलवे लाइन पर बन रहा रेलवे ओवरब्रिज आरओबी अब विकास नहीं, बल्कि अव्यवस्था, लापरवाही और जनता की पीड़ा का पर्याय बन चुका है। 35.07 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह आरओबी 24 माह में पूरा होना था, लेकिन 30 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी निर्माण अधूरा है। ठेकेदार की घोर लापरवाही ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को मजाक बनाकर रख दिया है।
22 जून 2023 को शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में जुलाई 2023 से पीआरएल प्रोजेक्ट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर ने कार्य प्रारंभ किया था, लेकिन आज हालात यह हैं कि साइट पर काम ठप पड़ा है और जनता जाम, धूल और प्रदूषण की मार झेल रही है। वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार आरओबी निर्माण में देरी की सबसे बड़ी वजह साइट पर मजदूरों की भारी कमी है। कई दिनों तक एक भी मजदूर नजर नहीं आता, मशीनें जंग खा रही हैं और निर्माण सामग्री यूं ही पड़ी हुई है। इससे साफ है कि ठेकेदार को न तो समय सीमा की चिंता है और न ही जनता की परेशानी की। पीडब्ल्यूडी सेतु निर्माण शाखा की ढीली मॉनिटरिंग ने ठेकेदार को खुली छूट दे दी है। करोड़ों रुपये की योजना होने के बावजूद न तो गति है और न ही जवाबदेही। इधर रेलवे ओवरब्रिज आरओबी के अधूरे निर्माण ने बरगवां क्षेत्र के व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। ओवरब्रिज निर्माणाधीन होने के कारण यहां के व्यवसायों पर व्यापक और लगातार असर पड़ रहा है। हालात यह है कि करीब 200 मीटर की परिधि में स्थित दुकानदार पूरे दिन ग्राहकों की राह ताकते रह जाते हैं, लेकिन दुकानें सूनी पड़ी रहती हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पहले जहां सुबह से शाम तक बाजार में रौनक रहती थी, अब वहां सन्नाटा पसरा रहता है। जाम, खुदाई, धूल और अव्यवस्थित यातायात ने ग्राहकों को इस इलाके से दूर कर दिया है। लोग मजबूरी में वैकल्पिक रास्तों और दूसरे बाजारों का रुख कर रहे हैं, जिससे यहां के व्यापारियों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार हो रहा है। यह समस्या आज की नहीं, बल्कि पिछले 30 महीनों से चली आ रही है। बावजूद इसके ठेकेदार को न तो व्यापारियों की पीड़ा दिखाई दे रही है और न ही प्रशासनिक दबाव का कोई असर नजर आ रहा है। न काम में तेजी है, न नुकसान की भरपाई की कोई योजना।
जाम, धूल और प्रदूषण, बरगवां बाजार के व्यापारी परेशान
आरओबी अधूरा होने का सबसे बड़ा असर बरगवां बाजार और सब्जी मंडी रोड के व्यापारियों पर पड़ रहा है। रोजाना लगने वाले जाम के कारण ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई है, जिससे व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ऊपर से निर्माण स्थल से उड़ती धूल ने हालात और बदतर कर दिए हैं। दुकानों में धूल की मोटी परत जम जाती है, खाने-पीने की दुकानों में स्वच्छता पर सवाल खड़े हो गए हैं और व्यापारियों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारी बताते हैं कि प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। बावजूद इसके न तो ठेकेदार पानी का छिड़काव करवा रहा है और न ही कोई प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था है। लगातार यहां के व्यापारी जिला प्रशासन के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण अमले का भी ध्यान आकृष्ट करा रहे हैं, लेकिन फिर भी परीणाम सार्थक नही दिख रहा है।
सैकड़ों वाहन रोजाना फंसते हैं जाम में
बरगवां-बैढ़न मार्ग पर मझौली बरगवां रेलवे स्टेशन के पास रेलवे क्रॉसिंग नंबर 105 से प्रतिदिन 50 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। फाटक बंद होते ही दोनों ओर लंबा जाम लग जाता है। एंबुलेंस, स्कूली वाहन और आपात सेवाएं भी फंस जाती हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी बनी हुई है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद भी मार्ग दोबारा अतिक्रमण की चपेट में है। सेतु निर्माण शाखा के अधिकारी वीके सिंह ने देरी स्वीकार की है, लेकिन सवाल यह है कि सिर्फ बयान से कब तक जनता को बहलाया जाएगा। बरगवां की जनता, व्यापारी और राहगीर अब जवाब चाहते हैं, क्या ठेकेदार पर कार्रवाई होगी या 35 करोड़ का यह आरओबी यूं ही धूल, जाम और प्रदूषण में दबा रहेगा।