दस साल में बायपास के शहरी हिस्से पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पांच सौ करोड़ रुपयेे कर चुका है। पहले 325 करोड़ रुपये में चार लेन बायपास को छह लेन किया गया। इसके बदले ठेकेदार कंपनी को 25 सालों के लिए टोल वसूलने का अनुबंध भी प्राधिकरण ने किया था।
20 साल पहले देवास से राऊ तक बना बायपास अब ट्रैफिक की राह आसान करेगा। बायपास के आसपास टाउनशिप, माॅल और मैरेज गार्डन बनने के बाद यहां कई बार ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बन रही है, लेकिन अब अब बायपास पर तीन ब्रिज बन रहे है, जो ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाएंगे।
ब्रिज के नीचे से शहरी ट्रैफिक गुजर जाएगा,जबकि महाराष्ट्र व भोपाल की तरफ जाने वाला ट्रैफिक ब्रिजों से गुजर सकेगा। तीनों ब्रिजों का निर्माण शुरू हो चुका है और सालभर में बनकर तैयार हो जाएंगे। राऊ ब्रिज का 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इन ब्रिजों के निर्माण पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 200 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। यह ब्रिज इंदौर के 12 किलोमीटर हिस्से में बन रहे है,क्योकि इस हिस्से में ही बायपास पर सबसे ज्यादा ट्रैफिक का दबाव रहता है।
दस साल में शहरी हिस्से में पांच सौ करोड़ खर्च
दस साल में बायपास के शहरी हिस्से पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पांच सौ करोड़ रुपयेे कर चुका है। पहले 325 करोड़ रुपये में चार लेन बायपास को छह लेन किया गया। इसके बदले ठेकेदार कंपनी को बायपास पर 25 सालों के लिए टोल वसूलने का अनुबंध भी प्राधिकरण ने किया था, हालांकि ठेकेदार कंपनी से प्राधिकरण ने टोल का संचालन वापस ले लिया।कंपनी ने इंदौर में सिर्फ भंवरकुआ चौराहे पर ब्रिज बनाया था, जबकि चार स्थानों पर अंडरपास बनाए गए थे, लेकिन अंडरपास में रोज शाम के समय यातायात बाधित होता हैै।
राऊ ब्रिज सबसे पहले बनेगा
अफसरों ने बताया कि अब बायपास के राऊ, रालामंडल और एमआर-10 जंक्शन पर ब्रिज का निर्माण हो रहा है। सबसे पहले राऊ बायपास बनकर तैयार होगा। एमआर-10 जंक्शन पर थ्री लेयर ब्रिज तैयार हो रहा है। इसके निर्माण में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।
रालामंडल गांव के पास ब्रिज नहीं होने पर लोग डिवाइडर तोड़कर बायपास पार करते थे। इस कारण हमेशा हादसे का अंदेशा बना रहता है। 12 किलोमीटर हिस्से मेें बायपास की सर्विस रोड बनाने के लिए प्राधिकरण ने नगर निगम को 80 करोड़ रुपये दिए है, हालांकि नगर निगम ने कई हिस्सों में अभी सर्विस रोड नहीं बनाई है।
Published by:अमर उजाला, इंदौर