देवसर जनपद पंचायत में हो रहा सरपंच,सचिवों का शोषण

देवसर जनपद पंचायत में हो रहा सरपंच,सचिवों का शोषण

देवसर । जनपद पंचायत देवसर आजकल भ्रष्टाचार का अखाड़ा बनता जा रहा है जहां अधिकारियों एवं भ्रष्टाचार के अमली जामा पहनाने के लिए हर कोई व्याकुल नजर आ रहा है।
जहां एक ओर ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्य करने के लिए सरपंच सचिव स्वतंत्र हैं। वहीं दूसरी ओर मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.के सिंह की यह मंशा है कि सरपंच सचिव बिना हमसे पूछे कोई भी प्रशासकीय स्वीकृति जारी न करें और जो भी प्रशासकीय स्वीकृति जारी हो उससे पहले हमसे मंजूरी लें और मंजूरी के नाम पर चढोत्तरी करें ! मामला तब प्रकाश में आया जब देवसर जनपद पंचायत में स्टॉप डेम,चेक डैम और पीसीसी,पुलिया तथा अन्य मनरेगा योजना के निर्माण कार्यों कि तकनीकी स्वीकृति बिना मुख्य कार्यपालन अधिकारी से पूछे आर.ई.एस. एसडीओ अरुण चतुर्वेदी ने कर दिया और मामला मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.के सिंह की प्रतिष्ठा कम हो गया।
मजे की बात तो यह है कि बी.के सिंह मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत देवसर में भाजपा और कांग्रेस के नेताओं को सरपंच सचिवों पर दवाब डालकर एक-एक काम देर कर उनका मुंह भी बंद करा देते हैं। और शेष पंचायतों में मनमाना तौर पर सरपंच सचिवों को मटेरियल, वोर्ड, कुर्सी फर्नीचर या अन्य किसी सामग्री पर भुगतान अपने लोगों के नाम पर करवा लेते हैं।
आज कल एकाधिकार न चल पाने के कारण देवसर जनपद आर.ई.एस. विभाग कि प्रतिदिन सुबह दैनिक समाचार सुर्खियों में बना रहता है। और मजे की बात तो यह है कि अभी हाल ही में देवसर ग्रामीण यांत्रिकी विभाग उप संभाग देवसर के अनुविभागीय अधिकारी अरुण चतुर्वेदी ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्य का तकनीकी स्वीकृति जारी कर दिया जिसकी जांच की जिम्मेदारी कार्यपालन यंत्री भगोले साहब को सौंप दी गई हैं जबकि भगोले साहब जब तत्कालीन एसडीओ देवसर थे, उनके ऊपर भी ग्राम पंचायत उज्जैनी के मूल्यांकन का गंभीर आरोप लग चुका है। जिस पर जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी के यहां कुछ उपयंत्रीयों को दंडित भी किया जा चुका है, और भगोले साहब के ऊपर भी कार्रवाई होना सूत्रों की माने तो प्रस्तावित है।
दुर्भाग्य तो तब शुरू होता है कि देवसर मुख्य कार्यपालन अधिकारी बीके सिंह के यहां कई बार शिकायत के बावजूद भी ग्राम पंचायत कुर्सा में चल रहे एक कथित भाजपा नेता के निर्माण कार्यों की जांच नहीं हो पा रही है। जबकि लोगों का कहना है कि स्वयं मुख्य कार्यपालन अधिकारी की इच्छा से ही सब हो रहा है। देखना यह है कि जिला प्रशासन क्या पंचायतों को माप पुस्तिका और मास्टर रोल जारी करने के नाम पर शोषण मुक्त करा पाएंगे।