बगदरा अंचल में नौनिहालों का निवाला छिन रहे समूह

जिले सबसे दुर्गम क्षेत्र बगदरा अंचल के नौनिहालों के हक पर कई स्व सहायता समूहों के द्वारा हक पर डाका डाला जा रहा है। ऐसे कई स्व सहायता समूह हैं जहां निर्धारित मीनू के अनुसार मिड-डे-मिल नहीं बना रहे हैं। वहीं कई विद्यालयों में कभी कभार ही मिड-डे-मिल खिचड़ी या चावल, दाल बनाकर बच्चों को परोसा जा रहा है। संकुल केन्द्र बगदरा के शासकीय प्राथमिक विद्यालय भुईधरवा का यही कहानी है।
गौरतलब हो कि चितरंगी ब्लाक का बगदरा उप तहसील सबसे दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्र माना जाता है। जिसके चलते इस क्षेत्र के भोले-भाले गरीब आदिवासियों का आर्थिक शोषण भी जमकर किया जा रहा है। वहीं सरकार के नुमाइंदे इस क्षेत्र पर ज्यादा फोकस नहीं करते और न ही समय-समय पर भ्रमण करते हैं। जब कभी शिविर या कलेक्टर सहित बड़े नेताओं का बगदरा अंचल में दौरा कार्यक्रम बनता है तब खण्ड स्तर के अधिकारियों की अचानक नींद खुलती है और वे भी क्षेत्र के भ्रमण पर निकल जाते हैं। इसके पहले खण्ड स्तर के अधिकारियों को नियमित रूप से बगदरा अंचल का भ्रमण करने से कंजूसी कर रहे हैं या सरकारी कार्य के अधिकता की व्यस्तता के चलते उन्हें फुर्सत नहीं मिल पा रही है। कारण जो भी हो बगदरा अंचल की सरकारी व्यवस्थाएं अभी भी बेपटरी पर हैं। जिला एवं खण्ड स्तर के अधिकारियों की उदासीनता के बदौलत मिड-डे-मिल व्यवस्था बेपटरी पर है। सूत्रों ने बताया है कि यहां के कई स्व सहायता समूहों को कुछेक सरपंचों के देख रेख में चल रहा है। वहीं कुछ के कार्यधर्ता पीछे के दरवाजे से शिक्षक शामिल हैं। जहां एमडीएम के नाम पर जमकर भर्रेशाही की जा रही है। कुछेक स्व सहायता समूह नौनिहालों का निवाला छिन रहे हैं। आरोप है कि शासकीय प्राथमिक विद्यालय भुईधरवा में मध्यान्ह भोजन कभी-कभार ही बनता है। गत दिवस नौनिहालों ने दबी जुबान में मास्साहब एवं वहां के माहौल को देख किसी तरह पीड़ा सुनाये। लेकिन तब तक में मौजूद मास्साहब बच्चों की तरफ आंख तरेरने लगे। हालांकि इस मध्यान्ह भोजन में मास्साहब शामिल नहीं हैं। मास्साहब के सामने समूह की शिकायत न हो,वर्ना कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए नौनिहाल बच्चों की तरफ मास्साहब आंख तरेरने लगे। इसके पीछे कई रहस्य बताये जा रहे हैं। मास्साहब का भी विद्यालय आना जाना कम ही होता है। उनकी शिकायत न हो इसलिए स्व सहायता समूह के बचाव में लगे रहते हैं। फिलहाल प्राथमिक विद्यालय भुईधरवा में एमडीएम के नाम पर मची भर्रेशाही को लेकर खण्ड स्तर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी तरह-तरह के सवाल खड़े किये जाने लगे हैं।

खुलकर आवाज नहीं उठाते ग्रामीण
भुईधरवा गांव के भोले-भाले कुछ ग्रामीणों ने अपना नाम न बताने से मना करते हुए बताया कि यहां किसी के खिलाफ खुलकर आवाज उठाना मुश्किल है। मध्यान्ह भोजन कब पकता है क्या-क्या बच्चों को मीनू के आधार पर मिलता है किसी को पता नहीं है। समूह का जब मन आया तभी मध्यान्ह भोजन पकाया जाता है और अपने मन मुताबिक ही मिड-डे-मिल बच्चों को परोसा जा रहा है। अधिकांशत: खिचड़ी एवं चावल, दाल से ही पेट भरा जाता है और यहां जब कभी भोजन पकता तो वह लकड़ी से चूल्हे पर ही बनता है और समूह का कर्ताधर्ता पर्दे के पीछे प्रभावशाली व्यक्ति होना बताया जा रहा है।

प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना में बंदरबांट
विद्यालयों में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना चलायी गयी है। जिसमें मिड-डे-मिल में निर्धारित मीनू के अनुसार सोमवार को रोटी, चावल के साथ तुअर की दाल और काबूली चने व टमाटर की सब्जी, मंगलवार को पूरी/पुलाव के साथ खिर या हलवा और मूंग बड़ी व आलू,टमाटर की सब्जी, बुधवार को रोटी/चावल के साथ चने की दाल एवं मिक्स सब्जी, गुरूवार को वेजिटेबल पुलाव और पकौड़े वाली कढ़ी, शुक्रवार को रोटी,चावल के साथ मूंग की दाल और हरे या सूखे मटर/सूखे चने की सब्जी,शनिवार को पराठा/पुलाव के साथ मिक्स सब्जी देने का निर्देश है किन्तु आरोप है कि अधिकांश तथाकथित स्व सहायता समूहों के द्वारा निर्धारित मध्यान्ह भोजन का मीनू गायब कर दिया गया है। जिसकी जानकारी एसडीएम से लेकर बीआरसीसी,पीसीओ एमडीएम प्रभारी तक को भी है। फिर भी इन पर कार्रवाई करने से गुरेज करते हैं इसके पीछे कई वजह बताया जा रहा है। अधिकांशत: कारण जगजाहिर है