बरदहा घाट से सिल्फी-कुड़ारी तक पक्की सड़क का इंतजार

बरदहा घाट से सिल्फी-कुड़ारी तक पक्की सड़क का इंतजार
चितरंगी जपं क्षेत्र का मामला, दशको से कच्चे रास्ते पर निर्भर ग्रामीण, चुनावी वायदो तक सीमित रह गये सड़क

सिंगरौली 29 मार्च। जनपद पंचायत चितरंगी के सबसे दूरस्थ अंचल बरदहा घाट हनुमान मंदिर से लेकर गोड़गवां-बरवाडीह, बंजरिया होकर सीमावर्ती सोनभद्र यूपी के सिल्फी-कुड़ारी तक पक्की सड़क ग्रामीणों को नसीब नही है।
दरअसल जनपद पंचायत क्षेत्र चितरंगी के अभी भी कई ऐसे गांव हैं, जहां पक्की सड़को की दरकार है। लोकसभा एवं विधानसभा तथा त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव के वक्त उम्मीदवार मतदाताओं को तरह-तरह के सपने दिखाते हैं, लेकिन चुनाव संपन्न के बाद क्या-क्या वायदे किये हैं, इसे नेता जी लोग भूल जाते हैं और पद पाने के लिए यदि उन्हें कोई चुनावी वायदे को याद दिलाने लगते हैं तो कथित नेताओं के पारा चढ़ जाता है। मजबूर होकर चुनावी वायदे को भूलने लगते हैं। ऐसा ही मामला चितरंगी जनपद पंचायत क्षेत्र के सबसे दूरस्थ अंचल बरदहा घाट-हनुमान मंदिर से गोड़गवां-बरवाडीह, बंजरिया कच्ची सड़क मार्ग का है। जहां ग्रामीण बताते हैं कि यह कच्ची सड़क आज से नही दशको से है। कभी किसी जनप्रतिनिधि ने इस कच्ची जर्जर सड़क को पक्की सड़क बनवाने के लिए जहमत नही उठाया है। लिहाजा सड़क दुर्दशा की आंसु बहा रहा है। ग्रामीण यह भी बताते हैं कि इस सड़क के बन जाने से करीब एक दर्जन गांवों के लोगों को सीधेतौर पर लाभ मिलेगा। सोनभद्र यूपी के सीमावर्ती गांव सिल्फी होते हुये घोरावल एवं कुण्डवासनी देवी कुड़ारी होते हुये चौपन जाने के लिए यह राह आसान हो जाएगी। साथ ही सड़क के बनने से तरह-तरह की जो समस्याएं जो हजारों लोगों को उठानी पड़ रही है, उससे लोगों को निजात मिलेगी। यहां के कई ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से कई बार इस 7 किलोमीटर जर्जर-खस्ताहाल सड़क को पक्की कराए जाने की मांग अर्से से की जा रही है। परंतु कोराश्वासन के बाद कुछ भी हाथ नही लगा। जबकि इस सड़क से खैड़ार, बरवाडीह, बंजरिया, झरकटा, गोड़गवां समेत कई गांव के लोगों का सिल्फी-कुड़ारी मार्ग से आना-जाना लगा रहता है। यहां तक की यहां के अधिकांश लोगों की रिश्तेदारियां सोनभद्र जिले में है। सड़क के बनने से दोनों प्रांतो के ग्रामीणों को आने-जाने में आसान होगा।
नेताओं को इस सड़क मार्ग की नही है चिंता: प्रमोद कुमार
इस संबंध में खैड़ार गांव के ही निवासी प्रमोद कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि इस सड़क से करीब एक दर्जन गांव के लोगों का सड़क पर दबाव रहता है। रोजाना सैकड़ों लोग इसी मार्ग से सीमावर्ती राज्य यूपी के सोनभद्र में जाते रहते हैं और सोनभद्र से लोगों का इस क्षेत्र में आना-जाना लगा रहता है। आगे बताया कि सड़क को पक्की बनाने के लिए बराबर मांग की जा रही है। परंतु नेताओं को इस सड़क की चिंता नही है। यही कारण है कि 7 किलोमीटर लम्बी-दूरी सड़क उपेक्षित है और इसका प्रभाव इस दुरांचल के ग्रामीणों पर पड़ रहा है।
उबड़-खाबड़, पथरीली सड़क में पैदल भी चलना कठिन: कमलेश
इस संबंध में ग्राम खैड़ार निवासी कमलेश चतुर्वेदी का कहना है कि बरदहा घाट हनुमान मंदिर से लेकर बरवाडीह, गोड़गवां तक आने-जाने के लिए यही एक इकलौता मार्ग है। जिसकी हालत इन दिनों काफी खराब है। उबड़-खाबड़, पथरीली सड़क में पैदल भी चलना कठिन है। साथ ही वाहनों के आने-जाने पर सड़क में धूल के गुब्बारे उड़ते हैं। यह समस्या आज से नही, दशको से है। आगे कहा कि यदि सड़क 7 किलोमीटर लम्बाई सड़क को पक्की करा दिया जाए तो यहां के हजारों लोगों का आवागमन सुविधा आसान हो जाएगा।