मध्य प्रदेश के इस शहर पर चलने लगा बुलडोजर, पूरा शहर होगा खाली 5 से 10 मकान रोज हो रहे हैं धराशाई
एनसीएल के अधिग्रहण के चलते बदल रही मोरवा की तस्वीर, मुआवजे और भविष्य को लेकर लोगों में गहरी चिंता
सिंगरौली। कभी भाईचारे, आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक विविधता की मिसाल रहा मोरवा शहर अब अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। सिंगरौली जिले के मोरवा क्षेत्र के लगभग आठ वार्डों को चरणबद्ध तरीके से खाली कराया जा रहा है। इन वार्डों की भूमि का अधिग्रहण नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) द्वारा किया जा रहा है।
मोरवा में बुलडोजर चलने की तस्वीरें लोगों को भावुक कर रही हैं, लेकिन यह कार्रवाई किसी प्रशासनिक बल प्रयोग का हिस्सा नहीं है। मुआवजा प्राप्त करने के बाद लोग स्वयं अपने घरों और दुकानों को तोड़ने के लिए मजबूर हैं। वर्षों से बसे आशियाने अब धीरे-धीरे मलबे में तब्दील होते जा रहे हैं।
मोरवा क्षेत्र लंबे समय से देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए लोगों का बसेरा रहा है। यहां विभिन्न समुदायों के लोग आपसी तालमेल और भाईचारे के साथ एक परिवार की तरह रहते थे। कई पीढ़ियों से यहां निवास कर रहे परिवारों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे आगे कहां जाएंगे और अपना जीवन कैसे दोबारा बसाएंगे।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि एनसीएल द्वारा दिया जा रहा मुआवजा वर्तमान महंगाई के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि इतनी राशि में किसी अन्य स्थान पर जमीन खरीदकर नया घर बनाना बेहद कठिन है।
मोरवा के उजड़ने का असर केवल मकानों और बाजारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हजारों बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होगी। क्षेत्र में संचालित सरस्वती शिशु मंदिर, क्राइस्ट ज्योति सेंट्रल स्कूल, आदर्श गंगा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, द हेरिटेज स्कूल, सेंट मैरी हाई सेकेंडरी स्कूल, प्राथमिक विद्यालय और कन्या विद्यालय सहित कई शिक्षण संस्थानों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विस्थापन के कारण बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और व्यापार सभी प्रभावित होंगे। जहां कुछ लोग नौकरी करते हैं, वहीं बड़ी संख्या में परिवार छोटे-बड़े व्यवसायों पर निर्भर हैं। ऐसे में मोरवा के उजड़ने के साथ हजारों लोगों के सामने आजीविका का संकट भी गहराता जा रहा है।
फिलहाल, क्षेत्र में विस्थापन, पुनर्वास और मुआवजे को लेकर असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है। लोग प्रशासन और एनसीएल से बेहतर पुनर्वास नीति तथा पर्याप्त मुआवजे की मांग कर रहे हैं।