रेत के ओवर लोडिंग परिवहन से जनता परेशान
स्थानीय जिम्मेदारों का संरक्षण,जिला प्रशासन मौन- आखिरकार जिम्मेदार कौन
प्राप्त जानकारी के अनुसार रेत खदान कारी से निकलने वाले वाहनों में आवश्यकता से अधिक रेत लोडिंग का फंडा ग्रामीणों के भी समझ से परे है।क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि क्षमता से अधिक और रेत से भरे ओवरलोडिंग वाहन प्रधानमंत्री सड़कों का भी बुरा हाल करते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि जहां एक तरफ जिला प्रशासन ओवरलोडिंग वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का मुहिम चला रहा है वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासनिक अफसर रेत से भरे ओवरलोडिंग वाहनों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।यदि देखा जाए तो ओवरलोडिंग का सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है।ऐसा ही एक नजारा समाचार-पत्र पर लगी फोटो में भी देखा जा सकता है।रही बात ओवरलोडिंग रेत वाहनों की तो यह सब खेल ठेकेदार की दबंगई और राजस्व विभाग के जिम्मेदारों द्वारा ठेकेदार को खुला संरक्षण प्रदान होने की वजह से फल फूल रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप जिम्मेदारों की जेब दिन- प्रतिदिन वजनी और गर्म होती जा रही है,तो फिर भला कार्यवाही क्यों? मजे की बात तो यह है कि जब कोई आम नागरिक अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निश्चित पैमाने के अंदर रेत का परिवहन करता है तो यही जिम्मेदार अफसर एक नहीं बल्कि सैकड़ों सवाल खड़े करते हैं,वहीं दूसरी ओर जब रेत से भरे ओवरलोडिंग बाहर निकलते हैं तो इन्ही जिम्मेदार अफसरों के द्वारा उन्हें बाकायदा संरक्षण प्रदान किया जाता है।अगर स्पष्टीकरण शब्दों में कहा जाए तो यह सब खेल ठेकेदार की मनमानी एवं जिम्मेदारों की मेहरबानी पर ही फल-फूल रहा है।
यद्यपि आये दिन इसी तरह रेत से भरे ओवरलोडिंग वाहन आधी रात से तड़के भोर तक देखे जा सकते हैं।
बशर्ते अफसोस इस बात का है कि स्थानीय जिम्मेदारों को बड़े से बड़े आइनें में भी वास्तविक नजारा नजर नहीं आता।आखिरकार यहाॅ तो जिम्मेदार ही वास्तविक नजारे के प्रति जानबूझकर अंजान बनें नजर आते हैं।
यहां तक कि स्थानीय जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली से जिला प्रशासन की भी नजर कोसो दूर है।अतः ग्रामीणों ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मांग किया है कि रेत से भरे ओवरलोडिंग वाहनों की निष्पक्ष जांच कराया जाये।जांच दौरान दोषी पाए गए ओवरलोडिंग रेत वाहनों पर कार्यवाही की जाए। साथ ही साथ आंख मिचौली का खेल खेलने वाले जिम्मेदारों पर भी संवैधानिक कार्यवाही की जाए।