सरस्वती शिशु मंदिर परसौना में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की मची धूम

सरस्वती शिशु मंदिर परसौना में कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष कमलेश बैस एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उपसरपंच रमेश गोस्वामी, विद्यालय के संयोजक राजीवलोचन दुबे तथा अनुसूचित जाति मोर्चा मण्डल सरई के अध्यक्ष रामप्रसाद वर्मा शामिल हुए। विद्यालय के छोटे-छोटे भैया बहिन लगभग पचासो की संख्या में श्रीकृष्ण के बाल रूप कान्हा, राधा रानी, भगवान शिव, श्रीराम लक्ष्मण, हनुमान जी, ब्रह्मा जी, नारद जी, माता सरस्वती, सुदामा, देवकी-वसुदेव, नन्द-यशोदा, ऋषि मुनि व अन्य देवताओं के रूप में नजर आए। अतिथियों ने अभिभावकों एवं छात्रों की उपस्थिति में श्रीकृष्ण के बाल रूप कान्हा एवं अन्य देवी-देवताओं के रूप में सजे भैया बहनों की आरती उतारी। तत्पश्चात जुलूस के माध्यम से राधा कृष्ण एवं अन्य देवी देवताओं की झांकी निकाली गई। जिसमें लगभग 500 की संख्या में अभिभावक एवं ग्रामीण जन शामिल हुए झांकी परसौना स्कूल चौराहा से होते हुए परसौना बाजार नहर तक पहुंच कर पुनः वापस विद्यालय में समागम हुआ। इस दौरान जगह-जगह माता बहनों ने रथ में सजे झांकियों में कन्हैया एवं अन्य देवी-देवताओं आरती उतारी एवं पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। भगवान श्री कृष्ण के जीवन दर्शन पर अपना विचार प्रकट करते हुए पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने कर्तव्य महान बताया है उन्होंने सहनशक्ति की भी मर्यादा तय की है जब शिशुपाल भरी सभा में उन्हें गाली देता है 100 गाली तक उसे माफ करते हैं। लेकिन जैसे ही 101 गाली होती है अपने चक्र सुदर्शन से उसकी जीवन लीला समाप्त करते हैं। कोई मां बेटे के प्यार की बात होती है उसमें हमेशा मैया यशोदा और कन्हैया का उदाहरण दिया जाता है जब प्रेम की बात आती है तो राधा और श्याम का चित्र अपने आप प्रतिबंबित होता है एक कुशल योद्धा के कर्तव्य की बात आती है तो वही श्री कृष्णा चैन की बांसुरी छोड़ शास्त्र उठाकर देश समाज की रक्षा करते हैं इसलिए श्री कृष्ण जैसा कोई प्रेमी नहीं, कोई बालक नहीं,कोई भाई नही और कोई ज्ञानी नहीं। उनके द्वारा गीता में दिए गए उपदेश को सारी दुनिया आत्मसात करती है इसलिए कहा जाता है वंदे कृष्ण जगतगुरुं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से विद्यालय के प्रधानाचार्य अनूप पाण्डेय, आचार्य स्वामी नाथ गुप्ता, निशान्त नापित, दिवाकर विश्वकर्मा, अर्चना पाण्डेय, शुकुल वर्मा, सुश्री कविता विश्वकर्मा, अभिभावकों में रामलल्लू साहू, सीताराम बैस, सुभगिया विश्वकर्मा, आशा देवी, विजय कुमार गुप्ता, राजकमल सोनी, रघुवीर गुप्ता, सुशील जायसवाल, चमेली प्रजापति, अनिल कुमार विश्वकर्मा, अखिलेश नापित, बाबूलाल प्रजापति, पंचराज केसरी, योगेश कुमार पटेल, संजीव कुमार गुप्ता एवं बृजेश शाह सहित सैकड़ो की संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे।