काले मृगों के नाम से जाना जाता है बगदरा अभ्यारण्य क्षेत्र

सिंगरौली 19 अगस्त। जिले के दूरस्थ अंचल अभ्यारण्य बगदरा के कैमोर जंगल में काले मृग सहित अन्य वन्य प्राणियों के गणना एवं लेखा-जोखा की जानकारी संजय टाईगर रिजर्व सीधी के पास नहीं है। सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गयी जानकारी से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
गौरतलब हो कि जिले के बगदरा अभ्यारण्य क्षेत्र कैमोर पहाड़ जंगल काले मृगों के नाम से प्रसिद्ध है। संजय रिजर्व टाईगर सीधी इसे काले मृग के नाम पर पर्यटन स्थल भी बनाया है। लेकिन अभ्यारण्य में वन्य जीव प्राणियों के गणना एवं इसका लेखा-जोखा वर्तमान में कितने वन्य प्राणी हैं इसकी जानकारी संजय टाईगर रिजर्व के पास नहीं है। दरअसल सूचना अधिकार अधिनियम के तहत कुछ महीने पहले एक समाजसेवी एक्टिविटीज ने उप संचालक संजय रिजर्व टाईगर सीधी से अभ्यारण्य बगदरा क्षेत्र के संबंध में 12 बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। जिसमें मुख्य रूप से बगदरा को वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित किये जाने के वर्ष में काले मृगों एवं नील गायों दोनों की अलग-अलग संख्या कितनी है। साथ ही बगदरा को वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित होने के वर्ष में अन्य जंगली जानवरों, पशुओं की अलग-अलग संख्या तत्काल में बगदरा वन्य जीव अभ्यारण्य के भीतर काले मृगों, नील गायों तथा अन्य जंगली जानवरों एवं पशुओं की गणना हुई है तो वर्तमान में उन सभी वन्य प्राणियों की अलग-अलग संख्या की जानकारी मांगा था। जिसके जबाव में उप संचालक संजय टाईगर रिजर्व सीधी ने लिखित में जानकारी देते हुए अवगत कराया है कि बगदरा वन्य जीव अभ्यारण्य की अधिसूचना वर्ष 1978 दिनांक 15 फरवरी को जारी की गयी थी। उस दौरान अभ्यारण्य वन मण्डल पूर्वी सीधी, वर्तमान वन मण्डल सिंगरौली के अधीन था। अधिसूचना/घोषणा के समय वर्ष में काले मृगों एवं नील गायों की संख्या संबंधी जानकारी वन मण्डल में नहीं है। वहीं राष्ट्रीय ब्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण के निर्देशन अनुसार संजय टाईगर रिजर्व, बगदरा अभ्यारण्य सहित वन्य प्राणियों के गणना के डाटा, जानकारी साफ्ट, हार्ड डिस्क के माध्यम से संचालक राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के यहां 5 मई 2022 से परीक्षण एवं सत्यापन के लिए प्रेषित की जा चुकी है। वर्तमान समय में उनके द्वारा आंकड़े इस कार्यालय को अप्राप्त हैं। फलस्वरूप वन्य प्राणियों के जानकारी की संख्या देने से मना कर दिया गया। फिलहाल बगदरा अभ्यारण्य क्षेत्र काले मृग स्थली के नाम से मशहूर है। साथ ही इस क्षेत्र में किसी जमाने में नील गाय भी बहुतायत की संख्या में दिखाई देती थीं। लेकिन काले मृगों के दर्शन भी जहां दुर्लभ हो जा रहे हैं। पर्यटकों की नजरें काले मृगों को ढूढती नजर आती हैं। फिर भी कहीं नहीं दिखाई देते। कभी-ककहांभार एक्का-दुक्का नील गाय दिखाई दे देती हैं।गायब हो गये काले मृगों का झुण्ड
बगदरा के कुलकवार के अकलाडांड़ खरखौली पिपरखड़ करौंदिया के आस-पास किसी जमाने में बहुतायत मात्रा में काले मृगों का झुण्ड सुबह-शाम दिखाई देते थे। लेकिन अब इन काले मृगों के दर्शन के लिए भी लोग लालायित रहते हैं। काले मृग कहां चले गये इसका जबाव उप संचालक संजय टाईगर रिजर्व सीधी के पास भी नहीं है। जबकि गांव के लोग बताते हैं कि यूपी से आने वाले शिकारियों ने काम तमाम कर दिया। अभी भी शिकारी सक्रिय हैं। सबसे ज्यादा इस क्षेत्र में यूपी के शिकारियों का दबदबा रहता है। यही कारण है कि काले मृग नहीं दिखाई देते। अब दूर-दूर तक नहीं नजर आते काले मृग
अभ्यारण्य के जानवरों का नहीं है गणना
सूचना अधिकार अधिनियम से हुआ खुलासा उप संचालक संजय टाईगर रिजर्व ने दी है जानकारी
सिंगरौली 19 अगस्त। जिले के दूरस्थ अंचल अभ्यारण्य बगदरा के कैमोर जंगल में काले मृग सहित अन्य वन्य प्राणियों के गणना एवं लेखा-जोखा की जानकारी संजय टाईगर रिजर्व सीधी के पास नहीं है। सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गयी जानकारी से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
गौरतलब हो कि जिले के बगदरा अभ्यारण्य क्षेत्र कैमोर पहाड़ जंगल काले मृगों के नाम से प्रसिद्ध है। संजय रिजर्व टाईगर सीधी इसे काले मृग के नाम पर पर्यटन स्थल भी बनाया है। लेकिन अभ्यारण्य में वन्य जीव प्राणियों के गणना एवं इसका लेखा-जोखा वर्तमान में कितने वन्य प्राणी हैं इसकी जानकारी संजय टाईगर रिजर्व के पास नहीं है। दरअसल सूचना अधिकार अधिनियम के तहत कुछ महीने पहले एक समाजसेवी एक्टिविटीज ने उप संचालक संजय रिजर्व टाईगर सीधी से अभ्यारण्य बगदरा क्षेत्र के संबंध में 12 बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। जिसमें मुख्य रूप से बगदरा को वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित किये जाने के वर्ष में काले मृगों एवं नील गायों दोनों की अलग-अलग संख्या कितनी है। साथ ही बगदरा को वन्य जीव अभ्यारण्य घोषित होने के वर्ष में अन्य जंगली जानवरों, पशुओं की अलग-अलग संख्या तत्काल में बगदरा वन्य जीव अभ्यारण्य के भीतर काले मृगों, नील गायों तथा अन्य जंगली जानवरों एवं पशुओं की गणना हुई है तो वर्तमान में उन सभी वन्य प्राणियों की अलग-अलग संख्या की जानकारी मांगा था। जिसके जबाव में उप संचालक संजय टाईगर रिजर्व सीधी ने लिखित में जानकारी देते हुए अवगत कराया है कि बगदरा वन्य जीव अभ्यारण्य की अधिसूचना वर्ष 1978 दिनांक 15 फरवरी को जारी की गयी थी। उस दौरान अभ्यारण्य वन मण्डल पूर्वी सीधी, वर्तमान वन मण्डल सिंगरौली के अधीन था। अधिसूचना/घोषणा के समय वर्ष में काले मृगों एवं नील गायों की संख्या संबंधी जानकारी वन मण्डल में नहीं है। वहीं राष्ट्रीय ब्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण के निर्देशन अनुसार संजय टाईगर रिजर्व, बगदरा अभ्यारण्य सहित वन्य प्राणियों के गणना के डाटा, जानकारी साफ्ट, हार्ड डिस्क के माध्यम से संचालक राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के यहां 5 मई 2022 से परीक्षण एवं सत्यापन के लिए प्रेषित की जा चुकी है। वर्तमान समय में उनके द्वारा आंकड़े इस कार्यालय को अप्राप्त हैं। फलस्वरूप वन्य प्राणियों के जानकारी की संख्या देने से मना कर दिया गया। फिलहाल बगदरा अभ्यारण्य क्षेत्र काले मृग स्थली के नाम से मशहूर है। साथ ही इस क्षेत्र में किसी जमाने में नील गाय भी बहुतायत की संख्या में दिखाई देती थीं। लेकिन काले मृगों के दर्शन भी जहां दुर्लभ हो जा रहे हैं। पर्यटकों की नजरें काले मृगों को ढूढती नजर आती हैं। फिर भी कहीं नहीं दिखाई देते। कभी-कभार एक्का-दुक्का नील गाय दिखाई दे देती हैं।
कहां गायब हो गये काले मृगों का झुण्ड
बगदरा के कुलकवार के अकलाडांड़,खरखौली, पिपरखड़, करौंदिया के आस-पास किसी जमाने में बहुतायत मात्रा में काले मृगों का झुण्ड सुबह-शाम दिखाई देते थे। लेकिन अब इन काले मृगों के दर्शन के लिए भी लोग लालायित रहते हैं। काले मृग कहां चले गये इसका जबाव उप संचालक संजय टाईगर रिजर्व सीधी के पास भी नहीं है। जबकि गांव के लोग बताते हैं कि यूपी से आने वाले शिकारियों ने काम तमाम कर दिया। अभी भी शिकारी सक्रिय हैं। सबसे ज्यादा इस क्षेत्र में यूपी के शिकारियों का दबदबा रहता है। यही कारण है कि काले मृग नहीं दिखाई देते।