सिंगरौली जिले में तकरीबन 1 महीने से 30 फीसदी आबादी आई फ्लू के चपेट में है। सबसे ज्यादा इसका प्रभाव स्कूली बच्चों में दिख रहा है। आई फ्लू से निपटने के लिए जिले के सरकारी अस्पताल जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में इन दिनों एक भी चिकित्सक नहीं हैं।
गौरतलब हो कि आई फ्लू का प्रकोप जिलेभर में पैर पसार लिया है। बच्चे, बूढ़े, नौजवान, महिला, पुरूष इस आई फ्लू के संक्रमण से जूझ रहे हैं। जिले के आबादी की तकरीबन 30 फीसदी जनसंख्या इस आई फ्लू के संक्रमण से ग्रसित है। सबसे ज्यादा इसका प्रभाव स्कूली बच्चों में है। जहां अधिकांश बच्चे इसी संक्रमण से जूझ रहे हंै। बताया जा रहा है कि आई फ्लू के चलते कई-कई दिनों तक स्कूली बच्चे विद्यालय भी नहीं जा पा रहे हैं। जिसके कारण उनका पठन-पाठन कार्य भी प्रभावित हो रहा है। इधर जैसे-जैसे आई फ्लू का संक्रमण तेज हो रहा है। वहीं जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में इस संक्रमण से निपटने के लिए माकूल व्यवस्था है। जिसके कारण गरीब तबके के लोग काफी परेशान रहते हैं। जिला चिकित्सालय में आंख के विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण लोगबाग निजी चिकित्सकों का सहारा लेने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन दिनों सबसे ज्यादा मेडिकल स्टोरों में आई फ्लू संबंधी दवाईयों की बिक्री खूब हो रही है। कई मेडिकल स्टोरों में दवाई खरीदने वाले लोगों की लंबी-लंबी कतारें भी दिख रही हैं। मेडिकल स्टोर के संचालक खुद बताते हैं कि सबसे ज्यादा बिक्री आंख बीमारी संबंधी दवाईयों की है। जबकि इस समय अन्य बीमारियां कम दिख रही हैं। फिलहाल जिले में आई फ्लू के बढ़ते संक्रमण को लेकर जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में इस बीमारी से निपटने के लिए माकूल व्यवस्था को लेकर भी लोग सवाल खड़े कर रहे हैं।
आई के चिकित्सक दो महीने से प्रशिक्षण के लिए चेन्नई में
जानकारी के मुताबिक जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर बैंढऩ में पदस्थ आंख के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ.विजय प्रताप सिंह तकरीबन दो महीने से प्रशिक्षण लेने चेन्नई गये हुए हैं। हालांकि आई फ्लू का प्रकोप तकरीबन एक महीने से है। जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में आंख के डॉ.विजय प्रताप सिंह इकलौते चिकित्सक हैं। आंख के चिकित्सक इन दिनों न होने से मरीजों को प्राइवेट चिकित्सकों का शरण लेना पड़ रहा है। हालांकि जिला मुख्यालय में गिने चुने ही प्राइवेट चिकित्सक हैं। उन्हीं के द्वारा आई फ्लू के संक्रमण से ग्रसित मरीजों का ईलाज किया जा रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण अंचलों के मरीजों को हो रही है। जहां अधिकांश सीएचसी में आंख संंबंधी बीमारी के देखभाले के लिए चिकित्सक नहीं हैं।
आई फ्लू संक्रमण रोकने इन बातों पर रखें ख्याल
मौसम बदलाव के साथ आई फ्लू का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इस संक्रमण से निपटने के लिए सीएमएचओ ने पिछले माह ही खण्ड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी किया था। जिसमें कहा था कि सुरक्षित पेयजल का उपयोग करें, किसी भी संदिग्ध दूषित जल के प्रकरण में उबला हुआ पानी, फिल्टराईज्ड पैकेज्ड पानी का उपयोग करें। पीने के पानी के कन्टेनरों को हर दिन अच्छी तरह धोना चाहिए। खाना खाने के पहले और शौंचालय का उपयोग करने के बाद साबुन व पानी से हाथ धोयें। आंख पर बार-बार ऊंगली न करें। हाथ साबुन से धोते रहें।
इनका कहना है
जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ.विजय प्रताप सिंह दो महीने से प्रशिक्षण के लिए चेन्नई गये हुए हैं। आई फ्लू से ग्रसित मरीजों को अन्य स्वास्थ्य सेवक जरूरत के अनुसार दवाईयां दे रहे हैं।
डॉ.ओपी झा
सिविल सर्जन,जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर बैढऩ,सिंगरौली