एनसीएल प्रबंधन ने नहीं मानी मांगें, अब कलेक्टर से वार्ता करेंगे संघर्ष समिति के पदाधिकारी

एनसीएल प्रबंधन ने नहीं मानी मांगें, अब कलेक्टर से वार्ता करेंगे संघर्ष समिति के पदाधिकारी

शासकीय भूमि पर बसे लोगों को पट्टेधारकों के तर्ज पर समानता का अधिकार समेत अन्य मामलों को लेकर संघर्ष समिति द्वारा एनसीएल मुख्यालय पर आंदोलन बेनतीजा निकली और अब सभी आगे जिला कलेक्टर से वार्ता की रणनीति बना रहे है।
हालांकि उन्होंने साफ किया कि उनका यह आंदोलन प्रबंधन से अंतिम निर्णय सुनने के लिए था अब आगे की रणनीति इख्तियार करते हुए वह जिला कलेक्टर से वार्ता करेंगे और विस्थापितों के हित की उनकी यह लड़ाई अनर्वत जारी रहेगी।

गौरतलब है कि मोरवा विस्थापन में एनसीएल प्रबंधन द्वारा शासकीय भूमि पर बसे लोगों से भेदभाव कर दोहरा मापदंड अपनाने को लेकर, पूरे मोरवा का एक साथ विस्थापन, पुनर्वास स्थल, शिक्षा, चिकित्सा आदि मुद्दों को लेकर सिंगरौली विस्थापित संघर्ष समिति द्वारा गुरुवार को एनसीएल मुख्यालय का घेराव किया गया था। सुबह 10 बजे से ही तय कार्यक्रम के तहत मोरवा के सैकड़ो लोगों ने मुख्यालय पहुंचकर प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान विस्थापितों ने एनसीएल मुख्यालय के सभी गेटों पर धरना देते हुए एनसीएल के अधिकारी व कर्मचारियों को मुख्यालय के अंदर कैद कर दिया। हालांकि विस्थापितों का आक्रोश देखते हुए विस्थापित नेताओं से वार्ता करने के लिए पहले महाप्रबंधक निरंजन रुकमान्दा पहुँचे, जिन्होंने स्पष्ट कर दिया कि शासकीय भूमि पर बसे लोगों को लेकर जिला कलेक्टर की अगुवाई में निर्णय ले लिया गया है और इस मुद्दे पर अब एनसीएल कोई भी फैसला नहीं ले सकता। साथ ही उन्होंने बताया कि एनसीएल प्रबंधन मोरवा के विस्थापितों को गोरबी में बसाने का प्रयास कर रहा है। इसके अलावा यदि शासन द्वारा भालूगढ़ में भूमि आवंटित कर दी जाती है तो विस्थापितों को वहां भी जगह दे दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीएल पूरे मोरवा का विस्थापन एक साथ कर रहा है।

बताते चलें कि पूर्व में भी संघर्ष समिति ने भी इन्हीं प्रमुख मांगों समेत अन्य मुद्दों को लेकर एनसीएल से वार्ता व खदान के मुहाने पर आंदोलन किया था, परंतु मंच के संरक्षक अमित तिवारी ने
कोई निष्कर्ष नहीं निकलता देख गुरुवार को एनसीएल मुख्यालय पहुंचकर प्रबंधन के मुख से अंतिम निर्णय सुनने का फैसला लिया था। हालांकि महाप्रबंधक से बात नहीं बनती देख प्रदर्शनकारी मुख्यालय पर ही डटे रहे और देर शाम 4 बजे एनसीएल के निदेशक (मानव/संसाधन) मनीष कुमार ने लोगों के समक्ष पहुंचकर उन्हें स्पष्ट तौर पर बता दिया कि शासकीय भूमि पर बसे लोगों के मुद्दे पर अब वह कोई अन्य फैसला नहीं ले सकते। उन्होंने मंच के पदाधिकारी को जिला कलेक्टर के समक्ष अपनी बात रखने की सलाह भी दी। समिति की अन्य मांगों पर कहते हुए उन्होंने बताया कि खदान के मुहाने पर बसे लोगों की चिंता करते हुए प्रबंधन पहले उन्हें नोटिस बांटने में लगा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विस्थापितों को मुआवजा वितरण की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील कर कहा की विस्थापितों के विकास और उसके उत्थान के लिए यदि किसी के पास कोई सुझाव है तो एनसीएल प्रबंधन उसपर विचार कर सीएसआर के मद्द से विस्थापित लोगों के लिए योजना चला सकती है। एनसीएल के निदेशक द्वारा भी विस्थापितों के हित में कोई फैसला नहीं लिए जाने के बाद अंततः संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर से वार्ता की बात को कहकर 6 घंटे बाद आंदोलन को समाप्त कर दिया।

हालात से निपटने के लिए प्रशासन ने संभाल रखा था मोर्चा
एनसीएल के रवैये को लेकर बड़ी संख्या में मोरवा के विस्थापित मुख्यालय पहुंचे थे। जिसमें महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। उनके द्वारा एनसीएल के सभी गेटों पर धरना देकर प्रबंधन को मुख्यालय के भीतर रहने पर मजबूर कर दिया गया था। इस दौरान स्थिति को संभालने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। अनुविभागीय अधिकारी मोरवा गौरव कुमार पांडे समेत मोरवा निरीक्षक यू पी सिंह, नवानगर निरीक्षक कपूर त्रिपाठी, विन्ध्यनगर निरीक्षक अर्चना द्विवेदी, निरीक्षक राजेंद्र पाठक, उपनिरीक्षक सुधाकर सिंह परिहार, रुद्र प्रताप सिंह भारी पुलिस बल के साथ लोगों को समझाने और स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे रहे।

6 घंटे तक मुख्यालय के अंदर कैद रहे अधिकारी व कर्मचारी
संघर्ष समिति के आह्ववान पर चले इस आंदोलन के दौरान विस्थापितों ने एनसीएल के तीनों गेटों पर घेराबंदी करते हुए एनसीएल के अधिकारियों को कैद में रहने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान कई बाहर निकलने के प्रयास में जुटे रहे पर लोगों के आक्रोश के आगे उनकी एक नहीं चली और उन्हें मजबूरन ऑफिस के अंदर लौटना पड़ा।

इनकी रही उपस्थित
इस मौके पर जनपद सदस्य राजेश गुप्ता, अशोक सिंह पैगाम, विनोद सिंह कुरूवंशी, राजेश गुप्ता, संजीव सिंह, बंटी सिन्हा, अरविन्द तिवारी सहित कई लोगो ने एनसीएल के विस्थापन नीति के विरोध में अपनी अपनी भड़ास निकालते हुए दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। वहीं अन्य विस्थापन मंचों ने इस आंदोलन में अपना मौन समर्थन दिया।