केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा में उन्नत कृषि तकनीक

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा में उन्नत कृषि तकनीक संगोष्ठी और खेल दिवस सहित अनेक कार्यक्रमों में सहभागिता की


खेल दिवस कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने चलाई दो किलोमीटर साईकिल, स्कूली बच्चों से भी किया संवाद
3.7 % कृषि की ग्रोथ देकर हमने अन्न के भंडार भर दिए- श्री शिवराज सिंह चौहान
किसानों के पैसे बेकार दवाइयों पर बर्बाद नहीं होंगे- श्री चौहान
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि 3 अक्टूबर से फिर किसानों के बीच पहुंचेंगे वैज्ञानिक

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा, मध्यप्रदेश का दौरा किया। दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने गणेश पूजन कर छात्र-छात्राओं से संवाद किया। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने खेल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत कर युवाओं व स्कूली बच्चों के साथ करीब 2 किलोमीटर साईकिल चलाई। इसके अलावा केन्द्रीय मंत्री, उन्नत कृषि तकनीक संगोष्ठी में शामिल हुए और उपस्थितजनों को संबोधित किया।

इस दौरान श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम पर दुनिया के कुछ देश दबाव बना रहे थे कि, खेती के लिए पूरा बाजार खोलो, लेकिन आज हम गर्व के साथ कह रहे हैं कि, भारत आज ऐसी स्थिति में है कि, दुनिया के समक्ष निडरता से अपना पक्ष रखता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भी कह दिया राष्ट्र हित सर्वोपरि है, किसानों के हितों से समझौता नहीं होगा। इस साल खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड स्तर पर वृद्धि हुई है, इतिहास रचते हुए 3.7 % कृषि की ग्रोथ देकर हमने अन्न के भंडार भर दिए।

किसानों के हित सर्वोपरि

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम पर टौरिफ लगाकर सोच रहे थे कि, भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट आएगी।  दुनिया में सबसे ज्यादा केवल 3 महीने में हमारे यहां जीडीपी ग्रोथ हुई है जिसमें सबसे बड़ा योगदान कृषि का है। उन्होंने कहा कि इस साल किसानों ने ऐसा उत्पादन किया है कि आज तक इतिहास में नहीं हुआ। 3.7 % कृषि की ग्रोथ देकर हमने अन्न के भंडार भर दिए हैं। गेहूं, चावल, मक्के का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। पहले एक जमाना था जब हम अमेरिका का खराब गेहूं पीएल-480 खाने पर मजबूर थे। लेकिन आज हमारे अन्न के भंडार भरपूर हैं। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

 

किसानों के पैसे बेकार दवाइयों पर बर्बाद नहीं होंगे

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले किसान जब डीएपी या यूरिया जैसी खाद लेने जाते थे तो डीलर जबरन बोतलें थमा देते थे। यह भी पता नहीं चलता था कि, बोतल में असली कीटनाशक है या नकली। बायोस्टिमुलेन्ट के नाम पर हज़ारों दवाइयां बाजार में धड़ल्ले से बिक रही थीं, जिनका कोई वैज्ञानिक परीक्षण तक नहीं था। उन्होंने साफ कहा कि अगर किसान को डीएपी, यूरिया या नैनो चाहिए तो वही मिलेगा, उसको ज़बरदस्ती दूसरी बोतल नहीं दी जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो एफआईआर होगी और मैं खुद देखूंगा। किसानों के साथ किसी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि बायोस्टिमुलेन्ट के नाम पर लगभग 30 हज़ार दवाइयां बेची जा रही थीं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था, लेकिन अब सिर्फ वही दवाइयां बिकेंगी जो आईसीएआर या कृषि विश्वविद्यालयों में परीक्षण के बाद प्रभावी साबित होंगी। उन्होंने कहा कि 30 हज़ार में से 22 हज़ार दवाइयां तो परीक्षण में आई ही नहीं। 8 हज़ार में से केवल 682 दवाइयां ही सही साबित हुईं। बाकी दवाइयां किसी भी हालत में नहीं बिकने दी जाएगी। उन्होंने भी कहा कि, नकली या बेअसर दवाइयों से अगर किसान की फसल बर्बाद होगी तो दोषी कंपनियों का लाइसेंस रद्द होगा और किसानों को मुआवज़ा मिलेगा।

हम प्राकृतिक खेती की दिशा में अग्रसर

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती को सही मायने में लाभ का धंधा बनाने के लिए दो ही बातें सबसे जरूरी हैं। पहला उत्पादन बढ़ाना और दूसरा उसकी लागत घटाना। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ा देने से काम नहीं चलेगा, खेती तभी फायदे का धंधा बनेगी जब उत्पादन बढ़े और साथ ही लागत भी कम हो। श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रगतिशील किसानों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि खाद और अन्य संसाधनों की लागत को वैज्ञानिक तरीकों से कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि, किसानों के लिए हमने 6 सूत्रीय रणनीति तैयार की है जिसमें उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उत्पादन के उचित दाम देना, नुकसान की भरपाई करना, कृषि का विविधीकरण करना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज भी खेती में विविधता पर जोर देते थे। जैसे कहा जाता था “चार घूंट पर चार फसल बोई लो” यानी फसल बदलते रहो। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए किसानों को विविधीकरण अपनाना होगा। श्री शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सरकार लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रही है, ताकि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर सकें।

रबी के लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में करीब 16 हज़ार वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन किसान तक उसका लाभ नहीं पहुंच पा रहा था। उन्होंने कहा कि, जब तक लैब को लैंड से नहीं जोड़ा जाएगा और वैज्ञानिकों को किसानों से नहीं मिलवाया जाएगा, तब तक कृषि क्षेत्र में अपेक्षित सुधार संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि, इसी सोच के तहत सरकार ने 2170 टीमें बनाकर वैज्ञानिकों को सीधे किसानों के बीच भेजा है। यह पहल आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि आगामी रबी की फसल के लिए भी 3 अक्टूबर, यानी दशहरे के अगले दिन से वैज्ञानिक फिर किसानों के खेतों में पहुंचेंगे और उन्हें नई तकनीकों व उन्नत खेती के उपायों की जानकारी देंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह अभियान किसानों को न सिर्फ नई तकनीक से जोड़ेगा बल्कि उन्हें उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने के व्यावहारिक तरीके भी सिखाएगा।

स्वदेशी अपनाने का आह्वान

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने आह्वान करते हुए कहा कि अपने रोज़मर्रा के इस्तेमाल की हर चीज़, चाहे वह पहनने की हो, खाने-पीने की हो या फिर तेल, साबुन जैसी दैनिक ज़रूरत की वस्तुएं हों, वो केवल देश में बनी वस्तुएं ही खरीदें।

उन्होंने कहा कि  विदेशी उत्पाद खरीदने से देश का धन बाहर चला जाता है, जबकि देशी सामान खरीदने से अपने ही लोगों को रोज़गार और व्यापार मिलता है।